धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी ईमानदार साख को ही एनटीए की साख मान लिया, तो उनका NEET विवाद की बली चढ़ना तय था (aajtak.in)। उनके इस्तीफे की तर्ज पर यह इस्तीफा बताता है कि निजी साख और सिस्टम में ढिलाई दो अलग-अलग है। इस विवाद के बारे में बोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि निजी साख और सिस्टम के बीच अंतर बहुत ज्यादा है। इस विवाद के कारण उनके बर्बाद हो जाने की आशंका है। इस बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि निजी साख के बारे में जानकारी नहीं होती है।
इस विवाद के बारे में बोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि निजी साख और सिस्टम के बीच अंतर बहुत ज्यादा है। इस विवाद के कारण उनके बर्बाद हो जाने की आशंका है। इस बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि निजी साख के बारे में जानकारी नहीं होती है।



























